सोनिया राहुल ने चली ये चाल की बहुमत के बाद भी भाजपा को कांग्रेस के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा

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लोकसभा में बहुमत मिलने के बाद भी कांग्रेस से भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना है। प्रचंड बहुमत लेकर लोकसभा में विराजमान मोदी सरकार को इस बार कांग्रेस की रणनीति के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा है।

संसद के शीतकालीन सत्र में भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार का दो बिलों पर खास ध्यान था। जिनमें से एक था तीन तलाक के खिलाफ मोदी सरकार की तरफ से बनाया गया विधेयक जिस पर पूरे देश की तो निगाहें टिकी ही थी लेकिन साथ ही विश्व भी नजरें गढ़ाएं बैठा। तो वहीं दूसरा बिल था ओबीसी जो इस बार लटक गया।

मीडिया में छाया रहा तीन तलाक

तीन तलाक का बिल पूरे सत्र में लाइमलाइट में रहा क्योंकि मीडिया की तरफ से इस बिल से जुड़े हर एक घटनाक्रम को बड़े जोर-शोर से दिखाया गया तो वहीं भाजपा सरकार की तरफ से बनाए गए दूसरे बिल ओबीसी पर किसी का ध्यान नहीं गया लेकिन ये बिल मोदी सरकार के लिए काफी खास था।

गौरतलब है कि मोदी सरकार के पास लोकसभा में बहुमत थी तो बहुत ही उत्साह के साथ बिना विपक्ष के सुझावों को मानें और अपनी मनमर्जी कर पास करा गए लेकिन जैसे ही ये बिल राज्यसभा में पेश किया गया तो वहां विपक्ष ने भी मोदी सरकार को उसी की तरह जवाब दिया और अपनी बहुमत का फायदा उठाते हुए बिल को पास नहीं होने दिया।

विपक्ष की रणनीति

गौरतलब है कि कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष का मानना है कि इस बिल में कई तरह की खामियां है तो इस बिल को स्थाई समिति में भेज कर दोबारा से बनाया जाए और मजबूती प्रदान की जाए। लेकिन लोकसभा में मोदी सरकार ने ना तो विपक्ष की इस मांग को माना और ना ही किसी सुझाव को अपनाया जिस कारण विपक्ष ने बिल को लेकर राज्यसभा में हंगामा किया।

भाजपा के सांसद नहीं रहे मौजूद

लेकिन विपक्ष के हंगामे से भी बढ़कर मोदी सरकार इस बिल को पास इसलिए भी नहीं करा पाई क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के अपने ही सांसद सत्र में मौजूद नहीं रहे यहां तक की खुद प्रधानमंत्री मोदी भी सत्र में नहीं नजर आए।

शाह ने जताई नाराजगी

वहीं भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने भी सांसदों के इस रवैये पर अपनी नाराजगी जताई है। सत्र से पहले भाजपा की तरफ से एक व्हिप भी जारी किया गया था जिसमें सभी सांसदों को सत्र में मौजूद रहने के लिए कहा गया था। बावजूद इसके सत्र में सांसद मौजूद नहीं रहे।

अमित शाह ने तो ये तक कहा कि जो सांसद काम करना चाहते हैं वो सदन में आए और जिन्हें काम नहीं करना वो अपने घर में बैठ कर आराम करें।


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