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भ्रष्टाचार विरोध के नाम पर अन्ना आंदोलन, उसे बैकडोर से समर्थन करने वाली आरएसएस और ईमानदारी का ढोंग रच रहे दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की हकीकत सामने आ गई है.

Arrest warrant issued against Kejriwal for tweeting against Modi

 

कहां तो सरकार बनने के बाद जन लोकपाल लाने के वायदे किए गए थें, शीला दीक्षित को गिरफ्तार करने के दावे किए गए थें, अब सब उल्टा हो रहा है. अरविंद के सगे भांजे विनय बंसल को भ्रष्टाचार निरोधक शाखा एसीबी ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

1. पीडब्ल्यूडी घोटाले में हुई गिरफ्तारी

एसीबी के स्पेशल कमिश्नर अरविंद दीप ने सीएम केजरीवाल के भांजे की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि दिल्ली मे काम करने वाली एनजीओ के संचालक राहुल शर्मा ने तथ्य मुहैया कराए थें.

इन दस्तावेजों में यह बताया गया था कि सीएम केजरीवाल के जीजा सुरेंद्र बंसल और उनके बेटे विनय बंसल ने पीडब्ल्यू विभाग से काम का ठेका लिया. काम पूरा भी नहीं हुआ और नकली कागजात दाखिल कर 10 करोड़ रुपये का पेमेंट ले लिया.

2. अलग अलग तीन केस दर्ज

राहुल शर्मा के दस्तावेज मुहैया कराए जाने के बाद एसीबी ने प्रारंभिक छानबीन की इसके बाद तीन एफआईआर दर्ज कराई गई घोटाले के मुख्य आरोपी केजरीवाल के जीजा सुरेंद्र बंसल थें. हालांकि थोड़े दिन पहले ही उनका देहांत हो गया. एसीबी अपने स्तर से जांच कर रही थी, जिसमें विनय बंसल की संलिप्तता पाई गई. इसके बाद गिरफ्तारी की कार्यवाही हुई.

3. कंपनी के मालिक हैं विनय बंसल

एसीबी के अधिकारियों ने बताय कि जिस कंपनी ने बिना काम किए पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट से रेणु कंस्ट्रक्शन नामक कंपनी ने फर्जी निकासी कराई, उसमें कई लोग हिस्सेदार है, इनमें से एक विनय बंसल भी हैं. खुद विनय बंसल ने बिल क्लियर कराने को लेकर अपने लेटरहेड से कई पत्र लिखे थें.

इसके बाद पुलिस ने उनके दिल्ली के पीतमपुरा स्थित आवास से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद बंसल से पूछताछ की जा रही है. इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया.

निष्कर्ष :-

देश में दो नेता इतिहास में अपने झूठे वायदों के लिए याद किए जाएंगें जिनमें एक तो पीएम नरेंद्र मोदी और दूसरे सीएम अरविंद केजरीवाल हैं. चुनाव जीतने के लिए इन दोनों ने जितने बड़े पैमाने पर झूठ बोला, उसने इतिहास रच दिया.

कांग्रेस को हराने के लिए दोनों ने झूठ नामक ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल किया और अपने मकसद में कामयाब भी हुए. अब देखने वाली बात यह है कि झूठ का यह प्रयोग कितने दिनों तक सफल और स्थाई रहता है.

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