बीजेपी नेताओं के बाद अब केजरीवाल भी हुआ राहुल गाँधी का दीवाना, मांग रहा मिलने का वक्त

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कोई माने या न माने, भारतीय राजनीति में तीसरा मोर्चा पूरी तरह से अप्रसांगिक है. देश की राजनीति में दो ध्रुव बन चुके हैं. पहला तो आप भारतीय जनता पार्टी के साथ हो या उनके विरोधी हो. कांग्रेस आज जैसी भी स्थिति में हो पर यथार्थ यही है कि भाजपा का मुकाबला वही कर सकती है. भाजपा विरोधी कोई भी गुट या गठबंधन कांग्रेस के बिना असंभव है.

बिना कांग्रेस के नेतृत्व के कोई भी भाजपा विरोधी गठबंधन कामयाब नहीं हो सकता. दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के साथ यही त्रासदी है कि वो किस के साथ खड़े हो, ये वो खुद समझ रहे हैं. दिल्ली की राजनीति में वो भले हीं सबसे बड़ा चेहरा हो लेकिन लोकसभा चुनाव में अगर इन दोनों में से किसी एक के साथ नहीं गए तो अप्रासंगिक हो जाएंगें.

1. कांग्रेस ने नहीं डाली घास

जैसा की आप जानते होंगें की राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी बी के हरिप्रसाद को एनडीए के उम्मीदवार हरिवंश ने शिकस्त दे दी. राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के तीन सदस्य हैं.

कांग्रेस के लिए ये 03 वोट महत्वपूर्ण साबित हो सकते थें लेकिन कांग्रेस ने उनसे संपर्क नहीं किया. कांग्रेस उम्मीदवार हरिप्रसाद ने व्यक्तिगत तौर पर भी उनसे वोट की अपील नहीं की. इस उपेक्षा की वजह से आप ने खुद को इस चुनाव से किनारे कर लिया.

2. खुद सांसद ने दी ट्वीटर पर जानकारी

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने खुद सोशल मीडिया पर यह जानकारी देते हुए कहा कि हमारे पास 03 वोट है. कांग्रेस ने हमसे वोट नहीं मांगा. हमारे लिए चुनाव बहिष्कार के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता. कांग्रेस प्रत्याशी हमारा वोट लेने के इच्छुक नहीं दिखते हैं तो फिर इसके अलावा हमारे पास कोई और रास्ता नहीं बचता है.

3. राष्ट्रपति चुनाव में दिया था कांग्रेस का साथ

विगत राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीरा कुमार ने आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल से व्यक्तिगत मुलाकात की थी जिसके बाद दिल्ली और पंजाब के आप विधायकों ने मीरा कुमार के पक्ष में मतदान किया था. उपराष्ट्रपति चुनाव में भी आप विधायकों का समर्थन कांग्रेस प्रत्याशी गोपाल कृष्ण गांधी को मिला था.

निष्कर्ष :

समय समय पर आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से दूरी बना कर रहते हैं. राहुल गांधी ने भी संदेश दे दिया है कि हम आप के साथ किसी भी तरह के राजनीतिक संबंधों के इच्छुक नहीं है. यह कांग्रेस की दुरगामी राजनीति को दर्शाने वाला कदम है.


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